sar takabbur men tha jhuka hi nahin | सर तकब्बुर में था झुका ही नहीं

  - Najmu Ansari Nazim

सर तकब्बुर में था झुका ही नहीं
फिर हुआ यूँँ कि सर उठा ही नहीं

दिल लगाया तो ये हुआ मालूम
दर्द-ए-दिल की कोई दवा ही नहीं

दुख को समझे दे साथ भी मेरा
यार ऐसा कोई मिला ही नहीं

वो ज़बाँ से जो घाव छोड़ा था
वो हरा है अभी भरा ही नहीं

सब की दौलत को देखने वालो
यूँँ किसी का भला हुआ ही नहीं

आपकी बातों से हुआ महसूस
आपको इश्क़ का पता ही नहीं

जीत का मेरी इक सबब ये भी है
मैं कभी ख़ुद से हारता ही नहीं

  - Najmu Ansari Nazim

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