बुलाया है मोहब्बत से उसे इस बार होली में
लुटाना है मुझे भी आज मिलकर प्यार होली में
बड़ी शिद्दत से बैठा हूँ मुझे है बस नशा उनका
हाँ करना आज उन सेे है मुझे इज़हार होली में
यही बस ग़म है थोड़ा सा नहीं आए मिरे पापा
हैं था
में आज भी सरहद पे वो हथियार होली में
बुरा अब तुम नहीं मानो लगाए रंग कोई गर
ख़ुशी से आज मिल कर सब बनाओ यार होली में
घिरा है हर कहीं इंसान मज़हब के मसाइल में
भुलाओ सब गिले-शिकवे सभी तकरार होली में
दिखाओ प्यार तुम इतना पड़ोसी मुल्क भी कह दे
बुलाओ यार हमको भी ये सरहद पार होली में
अकेले तुम नहीं नाज़िम लगाओ रंग चाहत के
यहाँ पर आए हैं देखो बहुत फ़नकार होली में।
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