हम तो तुम्हारे प्यार में पागल हैं आज भी
घाइल थे हुस्न ए यार से घाइल हैं आज भी
जिसने नज़ारा देख लिया होश खो दिया
यूँँ भी नगर में आपके पागल हैं आज भी
तुमने तो बोसा ले लिया बस एक पेड़ का
बाक़ी जो सारे पेड़ थे बिन फल हैं आज भी
पीतल को तुमने छू लिया सोना बना दिया
ज़ेवर तुम्हारे नाम के अव्वल हैं आज भी
ता'रीफ़ और जान ए जाँ क्या क्या मैं अब करूँँ
ज़ुल्फ़ें तुम्हारी रेशमी मख़मल हैं आज भी
रुक जाओ और रात के बारिश का दौर है
माैक़ा भी देखो ख़ूब है बादल हैं आज भी
नाज़िम को यूँँ भी नाज़ है कुछ अपनी जान पर
मेरी वफ़ा की पाँव में पायल हैं आज भी
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