मैं इस आग को फिर हवा दूँ

मैं फिर या'नी ख़ुद को जला दूँ

बना लूँ तुम्हें अपना कैसे
उसे दिल से कैसे भुला दूँ

मोहब्बत के रस्ते कठिन हैं
कहो क़िस्सा अपना सुना दूँ

मिरा क्या है कुछ भी नहीं अब
मैं तो जाँ भी अपनी गँवा दूँ

लगाया था दिल मैं ने उस से
है लाज़िम मैं ख़ुद को सज़ा दूँ

मोहब्बत है बस इक फ़साना
मोहब्बत को झूठी बता दूँ

कहूँ मैं ग़ज़ल ऐसी 'नाज़िम'
मोहब्बत की हस्ती मिटा दूँ

— Najmu Ansari Nazim

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Aanch Shayari

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