vo bhole bankar hain aise baithe ke jaise koi KHataa nahin hai | वो भोले बनकर हैं ऐसे बैठे के जैसे कोई ख़ता नहीं है

  - Najmu Ansari Nazim

वो भोले बनकर हैं ऐसे बैठे के जैसे कोई ख़ता नहीं है
गले लगा कर वो पूछते हैं यक़ीन क्या अब रहा नहीं है

यक़ीन कर लो है कहना उसका मगर मैं कैसे यक़ीन कर लूँ
थी सोई बाँहों में ग़ैर की वो उसे लगा कुछ पता नहीं है

हज़ारों वादे किए थे उसने जुदा न होंगे वचन लिया था
है बे-वफ़ा वो भी सब के जैसी किसी से वो भी जुदा नहीं है

वो तोड़ कर ख़ुश है दिल ये मेरा ख़ुदास भी वो डरा नहीं है
ख़ुदा उसे भी दे उसके जैसा वो कह रहा है ख़ुदा नहीं है

तिरी तो क़िस्मत यही है नाज़िम कि रोते रहना है दर्द लेकर
जो दर्द-ए-दिल को सुकून दे दे जहाँ में ऐसी दवा नहीं है

  - Najmu Ansari Nazim

Duniya Shayari

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