मिलने को रोज़ मिलते हैं यूँँ तो हज़ार लोग
मिलते नहीं हैं पर कहीं बचपन के यार लोग
लोगों से जा के मत कहो घर की कोई भी बात
पैदा करेंगे आपके घर में दरार लोग
हमने ज़रा जो प्यार से कर ली है गुफ़्तगू
होने लगे हैं देख लो सर पर सवार लोग
पागल था मैं जो आपके झाँसे में आ गया
करते कहाँ हैं इश्क़ कभी होशियार लोग
ख़ाली ये जेब है तो कोई पूछता नहीं
वरना सलाम करते थे हमको भी चार लोग
हमने तो ख़ुशियाँ बाँटी हैं दुनिया में बे-हिसाब
देते नहीं हैं पर हमें ग़म भी उधार लोग
'नाज़िम' तुम्हारे प्यार में बदनाम हो गया
मिलकर हँसी उड़ा रहे हैं अब तो यार लोग
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