chhod do yah ishq dushman mashwara dene laga | छोड़ दो यह इश्क़ दुश्मन मशवरा देने लगा

  - Najmu Ansari Nazim

छोड़ दो यह इश्क़ दुश्मन मशवरा देने लगा
जान का अपनी मुझे फिर वास्ता देने लगा

हुस्न वालों की हिमायत जान का नुक़सान है
जान से अपनी गया जो आसरा देने लगा

एक मतलब के कई होते हैं मतलब दोस्तों
दिल दुखा हँसता गया यूँँ हौसला देने लगा

ख़ुश नहीं था हाँ मगर हूँ ख़ुश बहुत मैंने कहा
हमनवा आया वो आकर आइना देने लगा

जीत तो जाता मगर मैं हार पर मजबूर था
जीत का तोहफ़ा जो सबको बे-वफ़ा देने लगा
इश्क़ की सब उलझनों से दूर तो मैं हो गया
वो पुराना दर्द मुझको फिर हवा देने लगा

रास्ता बाक़ी नहीं कुछ है यही क्या रास्ता
मर ही जाने का मुझे दिल रास्ता देने लगा

मौत तो 'नाज़िम' हसीं थी सबको अपना कर गई
दी थी जिसने बद्दुआ वो भी दु'आ देने लगा

  - Najmu Ansari Nazim

Hausla Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Najmu Ansari Nazim

As you were reading Shayari by Najmu Ansari Nazim

Similar Writers

our suggestion based on Najmu Ansari Nazim

Similar Moods

As you were reading Hausla Shayari Shayari