suna hai hamein bewafa tum kaho ho | सुना है हमें बेवफ़ा तुम कहो हो

  - Kaleem Aajiz

सुना है हमें बेवफ़ा तुम कहो हो
ज़रा हम से आँखें मिला लो तो जानें

  - Kaleem Aajiz

Breakup Shayari

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    तुम अपने बारे में कुछ देर सोचना छोड़ो
    तो मैं बताऊँ कि तुम किस क़दर अकेले हो
    Waseem Barelvi
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    वो बेवफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उसको
    कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उसको
    Naseer Turabi
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    मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी
    आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी

    हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं
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    Ismail Raaz
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    वो आ रहे हैं, वो आते हैं, आ रहे होंगे
    शब-ए-फ़िराक़ ये कह कर गुज़ार दी हम ने
    Faiz Ahmad Faiz
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    Saurabh Sharma 'sadaf'
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    एक अरसे तक अकेले हम चले
    फिर हमारा नाम चलने लग गया
    Tanoj Dadhich
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    या'नी मैं हिज्र काटने जंगल नहीं गया
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    Ismail Raaz
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    Bashir Badr
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    नींद हमेशा मुझसे धोखा करती है

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    Tehzeeb Hafi
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    तोहफ़ा दिया है ईद पे हम को जुदाई का
    Unknown
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    मिले तो उस को हमारा कोई सलाम कहे
    Kaleem Aajiz
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    वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ
    वफ़ा याद रक्खो सितम भूल जाओ
    Kaleem Aajiz
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    किस तरह कोई धूप में पिघले है जले है
    ये बात वो क्या जाने जो साए में पले है

    दिल दर्द की भट्टी में कई बार जले है
    तब एक ग़ज़ल हुस्न के साँचे में ढले है

    क्या दिल है कि इक साँस भी आराम न ले है
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    Kaleem Aajiz
    बड़ी तलब थी बड़ा इंतिज़ार देखो तो
    बहार लाई है कैसी बहार देखो तो

    ये क्या हुआ कि सलामत नहीं कोई दामन
    चमन में फूल खिले हैं कि ख़ार देखो तो

    लहू दिलों का चराग़ों में कल भी जलता था
    और आज भी है वही कारोबार देखो तो

    यहाँ हर इक रसन-ओ-दार ही दिखाता है
    अजीब शहर अजीब शहरयार देखो तो

    न कोई शाना बचा है न कोई आईना
    दराज़-दस्ती-ए-गेसू-ए-यार देखो तो

    किसी से प्यार नहीं फिर भी प्यार है सब से
    वो मस्त-ए-हुस्न है क्या होशियार देखो तो

    वो चुप भी बैठे है तो ऐसा बन के बैठे है
    हर इक अदा ये कहे है पुकार देखो तो

    अभी तो ख़ून का सिन्दूर ही लगाया है
    अभी करे है वो क्या क्या सिंगार देखो तो

    अदा हमीं ने सिखाई नज़र हमीं ने दी
    हमीं से आँख चुराओ हो यार देखो तो

    असीर कर के हमें क्या फिरे है इतराता
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    Kaleem Aajiz
    ये समुंदर है किनारे ही किनारे जाओ
    इश्क़ हर शख़्स के बस का नहीं प्यारे जाओ

    यूँ तो मक़्तल में तमाशाई बहुत आते हैं
    आओ उस वक़्त कि जिस वक़्त पुकारे जाओ

    दिल की बाज़ी लगे फिर जान की बाज़ी लग जाए
    इश्क़ में हार के बैठो नहीं हारे जाओ

    काम बन जाए अगर ज़ुल्फ़-ए-जुनूँ बन जाए
    इस लिए इस को सँवारो कि सँवारे जाओ

    कोई रस्ता कोई मंज़िल इसे दुश्वार नहीं
    जिस जगह चाहो मोहब्बत के सहारे जाओ

    हम तो मिट्टी से उगाएँगे मोहब्बत के गुलाब
    तुम अगर तोड़ने जाते हो सितारे जाओ

    डूबना होगा अगर डूबना तक़दीर में है
    चाहे कश्ती पे रहो चाहे किनारे जाओ

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    Kaleem Aajiz

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