कोई दीवाना है तो कोई बशर है पागल
इश्क़ को ढूँढती हर एक नज़र है पागल
हिज्र की चोट ने यूँ बा-वफ़ा रक्खा हम को
मैं भी पागल हूँ इधर वो भी उधर है पागल
मुझ को अब रुकना नहीं चलते चले जाना है
कोई रोके न मुझे मेरा सफ़र है पागल
झूठे ने झूठ कहा सब ने सलामी दी है
झूठा है ठीक यहाँ सच्चा मगर है पागल
है मोहब्बत की क़सम उस को मैं दिल दे दूँगा
यार 'नाज़िम' कोई दुनिया में अगर है पागल
— Najmu Ansari Nazim















