नींदों को मार देती है सो भी नहीं रहीआँखें ये अश्क-बार से रो भी नहीं रहीबाक़ी रहा न दिल में कोई भी सवाल अबधड़कन जो शोर करती थी वो भी नहीं रही— Najmu Ansari Nazim