बड़ी मुश्किल से सँभले हैं यूँँ फिर मा'ज़ूर नइँ होंगे

किसी के दिल की चौखट पर हम अब मामूर नइँ होंगे

किसी दिन मार डालेगी ये ख़ुश-फ़हमी जो हम को है
वो हम से प्यार करते हैं वो हम से दूर नइँ होंगे

ख़ुदा का वास्ता देकर बसा था दिल में वो आ कर
ख़ुदा के नाम पर भी अब तो हम मजबूर नइँ होंगे

पिलाते क्यूँ हो तुम यारो क़सम यूँ उस की दे देकर
ये मय के जाम पीने से मिरे ग़म दूर नइँ होंगे

जवानी जा रही होगी बुढ़ापा आ रहा होगा
जो मुँह को फेर लेते थे वो अब मग़रूर नइँ होंगे

सुना है पढ़ रहे हैं फिर वो 'नाज़िम' नाम की तस्बीह
सुना है कह रहे हैं वो कि हम अब दूर नइँ होंगे

— Najmu Ansari Nazim

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