मिलता नहीं है अब वो मिलनसार की तरहग़ुस्सा भी उस का तेज़ है तलवार की तरहख़ुशियाँ ये ईद की मिरी फिर ज़ाया' हो गईमुझ से ख़फ़ा है यार वो हर बार की तरह— Najmu Ansari Nazim