सदा ने किस की हमें पुकारा हमें तो कुछ भी पता नहीं है
सदा तो उस की बसी है दिल में मगर ये उस की सदा नहीं है
हवा नहीं है घटा नहीं है चराग़ फिर भी जला नहीं है
जला दिया है मकान लेकिन चराग़ रौशन हुआ नहीं है
ज़मीं भी ले लो ये घर भी ले लो जो कम लगे तो ये सर भी ले लो
मिरी तो जाँ अब चली गई है मिरा तो कुछ भी बचा नहीं है
लड़ाई करते थे रोज़ बच्चे तेरी नहीं है ये माँ है मेरी
जवाँ हुए हैं वो सारे जब से कोई भी माँ का हुआ नहीं है
है माँ सलामत तो कर लो ख़िदमत वो रोते हैं जिन की माँ नहीं है
है माँ के क़दमों के नीचे जन्नत कि माँ के जैसी दुआ नहीं है
— Najmu Ansari Nazim















