bure anjaam kii itni sigaalish ab nahin karta | बुरे अंजाम की इतनी सिगालिश अब नहीं करता

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

बुरे अंजाम की इतनी सिगालिश अब नहीं करता
मैं उनके सामने झूठी सताइश अब नहीं करता

मुझे आसान होने में बहुत मुश्किल हुई यारों
यहाँ से लौट जाओ मैं फ़वाहिश अब नहीं करता

ग़मों की रेत से मैंने हज़ारों दिल बनाए हैं
मगर हाँ इस हुनर की मैं नुमाइश अब नहीं करता

मिलोगे आसमाँ से जब कभी तो पूछना उस से
ज़मीनों की तलाशी क्यूँँ मुफ़त्तिश अब नहीं करता

गए दिन मस्जिदों की सीढ़ियों तक आब आया था
उसी दिन से ख़ुदा भी तेज़ बारिश अब नहीं करता

पुराने ज़ख़्म को जो याद कर के आँख भर आए
बशर इसके अलावा कुछ गिराइश अब नहीं करता

अगर मौक़ा मिला तो सब अलग पैकर बना लेंगे
यक़ीं कर मैं ख़ुदास ये गुज़ारिश अब नहीं करता

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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