in dayaaron men jo bhi bache the | इन दयारों में जो भी बचे थे

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

इन दयारों में जो भी बचे थे
वो तिरी बात में आ चुके थे

क़त्ल करता रहा तू ही मुफ़सिद
ख़ून से हाथ मेरे सने थे

भर गया तू बहुत नफ़रतों से
आज तेरी तरफ़ आइने थे

अब समझ आ रहा है दु'आ में
तुम मिरी मौत क्यूँँ माँगते थे

इक ख़ुदा आ गया है ज़मीं पर
इस क़दर आसमाँ घुट रहे थे

नाम आए न तेरा ज़बाँ पे
बात ग़ैरों की हम काटते थे

जो भी किरदार  पर लिख रहा हूँ
ये सभी हाल के तब्सिरे थे

दास्ताँ है हमारी तुम्हारी
सब जिसे सौ दफ़ा सुन चुके थे

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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