charche men rahte hain hamaare dil | चर्चे में रहते हैं हमारे दिल-लगी के मसअले

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

चर्चे में रहते हैं हमारे दिल-लगी के मसअले
कुछ ग़म मिलाकर और दो-छह ज़िंदगी के मसअले

लगता नहीं कि रह सकेंगे क़ाबिल-ए-इनआम हम
अब जिस तरह उठने लगे हैं उम्दगी के मसअले

तू हाथ अपना फेर सहराओं की तपती रेत पर
तुझको भी तो मालूम हो कुछ तफ़्तगी के मसअले

कब तक लिए बैठा रहूँ साग़र नया जाम-ए-कुहन
इनसे सुलझते ही नहीं अब तिश्नगी के मसअले

दिल में उजाले ख़ूब करते थे हम इक सूरज लिए
इमरोज़ फिर चुभने लगे हैं तीरगी के मसअले

  - Nikhil Tiwari 'Nazeel'

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