मुझे मैं आज कल साना नहीं लगता
दिलों में क्यूँ कभी फ़ाना नहीं लगता
असर है काम का अब भूख पे मेरे
बहन कहती इसे खाना नहीं लगता
यहाँ हर तिफ़्ल ग़ुर्बत को समझता है
वो अपनी बात से याना नहीं लगता
जनाज़ा क़र्ज़दारों का उठाने में
कभी भी चार का शाना नहीं लगता
बड़ी मेहनत से दिल पत्थर बनाया है
किसी का लफ़्ज़ अब ताना नहीं लगता
— Nikhil Tiwari 'Nazeel'















