अंदर से जो भी टूटा है
बाहरस खुलकर हँसता है
जो मेरी बात समझता हो
कोई शख़्स नहीं ऐसा है
मैंने जो भी देखा है कल
मेरी नजरों का धोखा है
अब बात नहीं पहले जैसी
अब मजबूरी का रिश्ता है
सब लोग मेरे बारे में क्यूँँ
कहते हैं लड़का अच्छा है
इक दिन मैं जब मर जाऊँगा
देखेँ कौन यहाँ रोता है
तस्वीर तेरी , ज़ाम , किताबें
बस इतना मेरा कमरा है
दिल पर जब आ बनती है तब
सब कहते हैं दिल बच्चा है
ईद चली जाती हो जब तुम
मेरा चाँद नहीं दिखता है
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