ये जो तुझ सेे ही सारी कुर्बत मुझे है
इसी बात की तो शिकायत मुझे है
मैं तुझ सेे यही तो कहा करता था जाँ
यक़ीं कर तिरे से मुहब्बत मुझे है
वो भी कह रही थी बुरे हो बहुत तुम
मैं भी मानता शक़ की आदत मुझे है
चलो जो हुआ सो हुआ ठीक है अब
मैंने जो किया उसपे गैरत मुझे है
ये भी जानता हूँ वो सुनता है मेरी
ये भी जानता हूँ कि गफ़लत मुझे है
उसे छूने में हाँथ ये काँपते हैं
उसे छूने में ये क्या मुसीबत मुझे है
मेरा उसको जब चूमने का हुआ मन
वो लरजा के बोली इज़ाजत मुझे है
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