ye jo tujhse hi saari qurbat mujhe hai | ये जो तुझ सेे ही सारी कुर्बत मुझे है

  - Prashant Sitapuri

ये जो तुझ सेे ही सारी कुर्बत मुझे है
इसी बात की तो शिकायत मुझे है

मैं तुझ सेे यही तो कहा करता था जाँ
यक़ीं कर तिरे से मुहब्बत मुझे है

वो भी कह रही थी बुरे हो बहुत तुम
मैं भी मानता शक़ की आदत मुझे है

चलो जो हुआ सो हुआ ठीक है अब
मैंने जो किया उसपे गैरत मुझे है

ये भी जानता हूँ वो सुनता है मेरी
ये भी जानता हूँ कि गफ़लत मुझे है

उसे छूने में हाँथ ये काँपते हैं
उसे छूने में ये क्या मुसीबत मुझे है

मेरा उसको जब चूमने का हुआ मन
वो लरजा के बोली इज़ाजत मुझे है

  - Prashant Sitapuri

Faith Shayari

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