आवारा फिरता बादल होने वाला हूँ
धीरे धीरे मैं पागल होने वाला हूँ
सर्दी की रातों में टूटे दिल वालों की
रोती यादों का कंबल होने वाला हूँ
तेरी यादों का काला साया है मुझ पर
मैं इस
में खो कर जंगल होने वाला हूँ
ख़्वाबों में डूबे पागल लोगों की ख़ातिर
मैं शायर बन गंगाजल होने वाला हूँ
तेरी यादों के अश्क़ों को भर भर के मैं
अब दरिया बन के जल थल होने वाला हूँ
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