सही में मर रहे हैं हम दवा भेजो
अरे तुम प्यार मत भेजो गिला भेजो
तुम्हीं ने है मिटाया नाम भी मेरा
मगर इस बात को छोड़ो दुआ भेजो
बदन पे चीर रहने से भी क्या होगा
ज़रा मन के लिए कोई ग़िता भेजो
नहीं बस में है सहना दर्द ये लेकिन
पुराने दर्द को छोड़ो नया भेजो
किताबों के जहाँ में अब अरे 'रौनक'
हमारे पास कोई तो ख़ुदा भेजो
— Raunak Karn















