Raunak Karn

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@RaunakKarn555

Raunak Karn shayari collection includes sher, ghazal and nazm available in Hindi and English. Dive in Raunak Karn's shayari and don't forget to save your favorite ones.

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Sher

मैं बच के इश्क़ के रस्ते से चलना चाहता हूँ मगर इक शख़्स इन आँखों में बसता जा रहा है — Raunak Karn
किसे कहते निकालो भीड़ से बाहर हमें 'रौनक' सो करना क्या था ख़ुद को और भी गुमनाम कर डाला — Raunak Karn
मिले हो जितने लोगों से अभी तक ज़िंदगी में तुम अरे उतने से तो हम ने अभी तक धोखा खाया है — Raunak Karn
कब से उस के ख़्वाब में उलझा बैठा हूँ यादों के तेज़ाब में उलझा बैठा हूँ — Raunak Karn
कपड़ा मकान छत हो ख़ुदा सबके पास में माँ बाप घर में हों यहाँ सब ख़ुश-नसीब हो — Raunak Karn
अगर अपना लिखा पढ़ लें कभी जो ग़ौर से रौनक हमें अपनी ग़ज़ल भी तब भला अपनी नहीं लगती — Raunak Karn
रहे बैचेन मेरी आँख हो तन पे पसीना कभी तो नींद में ऐसी चलो मुझ को सुला दो — Raunak Karn
तिरे ही साथ बितानी है ज़िंदगी पूरी बताओ मुझ को शुरू से शुरू मैं कैसे करूँँ — Raunak Karn
नहीं कहते किसी से भी अभी तकलीफ़ हम अपनी हमें मालूम है सुन कर सभी ठट्ठा उड़ाऍंगे — Raunak Karn
होंठ पे मुस्कान ले के सब शुमारे काट लेंगे वो न होगी उस की यादों के सहारे काट लेंगे — Raunak Karn
मुहब्बत में गई जब से अकेले छोड़ कर हम को ग़ज़ल अब एक भी हम सेे मुहब्बत पर नहीं होती — Raunak Karn
तुम आ सको तो आओ मेरे पास मेरे घर सच है यही मैं ने तो तुम्हें छोड़ दिया है — Raunak Karn

Ghazal

ख़ुश-नुमा होने से पहले सोच ले हम-वफ़ा होने से पहले सोच ले तुझ में मेरी जान बसती है सनम तू ख़फ़ा होने से पहले सोच ले दस गुना है इश्क़ मेरा पहले से सौ गुना होने से पहले सोच ले मौत के उस पार भी मैं तेरा हूँ तू जुदा होने से पहले सोच ले साफ़ दिल पे तो भरोसा कर ले तू इंतिहा होने से पहले सोच ले अनकही बातें कहा कर मुझ सेे तू इब्तिला होने से पहले सोच ले आ मेरे नज़दीक सर पे बोसा दूँ फ़ासला होने से पहले सोच ले तू लगा मरहम मेरे इस घाव पर दुख हरा होने से पहले सोच ले हद से बढ़ जाए मुहब्बत ये मेरी सर-फिरा होने से पहले सोच ले नाम 'रौनक़' तू कमा ले अपना अब बे-सदा होने से पहले सोच ले — Raunak Karn
है बुरा हाल हर दिवाने का और फिर डर भी है ज़माने का है हमें इंतिज़ार आने का फिर तुझे सीने से लगाने का झूट तो हम कभी नहीं कहते वक़्त है तुझ को सच बताने का हौले हौले हमें न मारो तुम ज़हर सीधा हमें पिलाने का क्यूँ हमें दे रहे हो तुम ताना क्या तरीक़ा है ये रुलाने का जान दे सकते हैं तेरी ख़ातिर जान हम को न आज़माने का झूट था प्यार झूट था वा'दा सब दिल-ओ-जान से भुलाने का मत करो याद उस को इतना भी ख़तरा रहता है जान जाने का करना है जो करो वो तुम मन से बोलना काम है ज़माने का आए थे प्यार वो बहुत ले कर मन था उन का भी छोड़ जाने का सोच मत ये मैं देर से आया है यही वक़्त मेरे आने का — Raunak Karn

Nazm

तुम को बताते कि उस पार क्या है निगाहों से होकर कभी दिल में जाते कलेजे पे रख सर सदा सी सुनाते वो ख़्वाबों की लोरी हक़ीक़त बनाते दु'आओं में जैसे कोई बात लाते मुझे अपने दिल की जो बातें बताती तो तुम को बताते कि उस पार क्या है छुपा के जो रक्खे थे लफ़्ज़ों में जज़्बें किए थे मिरे दिल पे तुम ने ही क़ब्ज़े तेरे नाम वाले सभी ख़त वहीं थे तेरे होंठ पे गीत मेरे भी बसते कभी पास आ कर अगर तुम जो पढ़ते तो तुम को बताते कि उस पार क्या है वो ख़्वाबों की रातें वो तन्हा सवेरा वो सन्नाटे जिन में था तेरा बसेरा लबों पे दुआ थी तेरे नाम वाली दुआ में थी बस रौशनी काली काली अगर एक पल को भी तुम मिलने आती तो तुम को बताते कि उस पार क्या है कभी धड़कनों में जो लफ़्ज़ों को पाते कभी साँसों से शे'र मेरे बनाते तेरे होंठ खुल के अगर कुछ भी कहते दिलों में मिरे लफ़्ज़ तेरे ही रहते जो तुम मेरी ख़ामोशियों को समझते तो तुम को बताते कि उस पार क्या है हरी धार लहरों की चलके जो आती मुहब्बत के मानी तुम्हें तब बताती मेरे दिल में बजते सभी राग गाते ज़रा सा कभी तुम जो वो राग गाती नज़र से नज़र को कभी तुम मिलाती तो तुम को बताते कि उस पार क्या है मुझे जो बताते अगर सब जताते तो मालूम होता कि उस पार क्या है ज़रा सा बताऊॅं कि उस पार क्या है है उस पार इक बेज़बाॅं सी कहानी जिसे पढ़ के आँखों में आ जाए पानी जिसे मैं ने ख़ुद को सुनाया हमेशा जिसे पढ़ के ख़ुद को है पाया अकेला न जाने वो इक चेहरा दिखने में प्यारा उसी के लिए है मिरे दिल में रिश्ते वही बन गए हैं मिरे दिल के हिस्से वो अश्कों की गर्मी वो नज़रों की छाया जिधर देखा मैं ने उधर उस को पाया वहाँ ख़्वाब बुनते हैं वीराने लम्हें जिसे देख धड़कन रहे सह में सह में वहाँ हर दुआ में तेरा नाम आता वहाँ हर ग़ज़ल में तू हीं मुस्कुराता वहाँ बिन तेरे कुछ भी रौशन नहीं है वहाँ तेरी बातें ही केवल सही हैं मैं हर दर्द को इक सहारा बनाता मैं तकलीफ़ों में तुझ को जीना सिखाता कभी बहते झरने किनारे जो मिलते गले से लगाता निगाहें बिछाता मुहब्बत है हम को ये तुम जान पाती इधर से निखरती उधर से सॅंवरती हँसी ख़ूब करती लगड़ती झगड़ती अगर तू कभी दिल की तह तक उतरती तो तुम को बताते कि उस पार क्या है तो तुम को बताते कि उस पार क्या है — Raunak Karn
“राखी” बहन ने बाँध कर राखी जताया प्यार राखी का बरस के बा'द आया फिर ये अब त्योहार राखी का चमन से फूल लाओ या ले आओ शाख़ ही कोई बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का हमें पहना के राखी और फिर बोले बहन मेरी सुनहरी शाख़ रेशम से बनी है प्यार की राखी मोहब्बत में कहा मैं ने कि ये सरदार राखी का बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का दुका वाले भी झू मेंगे अरे माली भी झूमेगा इसी त्योहार में जब फूल बनके राखी चूमेगा कभी भी प्यार को अपने नहीं भाई जताता है मुसीबत में पड़े बहना तो उस को वो बचाता है हमारी चाहतों पे है असर दिलदार राखी का बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का नहीं आता हैं भाई जब कभी सरहद से अपने घर अरे उस की बहन से पूछो ग़म उस के जुदाई का कभी राणा ने बोला था बहन के प्यार की बातें अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा बनाया है मुझे उस ने भला सरदार राखी का बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का — Raunak Karn
नज़्म- क्या लिखूँ लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को मेरे दिलबर मैं तुम को शाम, तुम को रात, तुम को चाँद, तुम को राह, तुम को चाह, तुम को शाह, तुम को बाह, तुम को नाह, बोलो मैं लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को मेरे दिलबर तुम्हें जीवन लिखूँ अपना या फिर लोबान मैं लिख दूँ लिखूँ महफ़िल तुम्हें अपना या फिर सुनसान मैं लिख दूँ लिखूँ दिलबर तुम्हें अपना या फिर मेहमान मैं लिख दूँ लिखूँ आँसू तुम्हें अपना या फिर मुस्कान मैं लिख दूँ लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को तुम्हें नादान, या अंजान या साथी, या लिख दूँ राह का रहबर, बता भी दो लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को मेरे दिलबर मैं तुम को धूप सूरज सा या शामों सा सुकूँ लिख दूँ लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को मैं अपना दिल मैं अपनी जान या धड़कन लिखूँ तुम को लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को क़लम लिख दूँ किताबें भी लिखूँ तुम को नयन की मैं चमक या फूल की धड़कन लिखूँ तुम को लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को लिखूँ तुम को मैं ठंडी रात का चादर या लिख दूँ नींद का बिस्तर, बता भी दो लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को मेरे दिलबर तुम्हें झुमका, तुम्हें आँचल, तुम्हें धड़कन तुम्हें चाँदी, तुम्हें सोना, तुम्हें हीरा तुम्हें पायल, तुम्हें कोमल, तुम्हें मूरत तुम्हें पीतल, तुम्हें जल थल, बता भी दो लिखूँ तो क्या लिखूँ तुम को मेरे दिलबर — Raunak Karn
"माँ क्या है?" माँ क्या है? वो झरना है माँ क्या है? वो धरती है माँ क्या है? वो नभ सारा माँ क्या है? बहती धारा माँ क्या है? वो जग सारा माँ क्या है? वो प्यारी है माँ क्या है? वो न्यारी है माँ क्या है? वो बादल है माँ क्या है? हाँ बारिश है माँ क्या है? वो महिमा है माँ क्या है? वो धड़कन है माँ क्या है? वो पूजा है माँ क्या है? वो अर्पण है माँ क्या है? वो दर्पण है माँ क्या है? वो चितवन है माँ क्या है? वो गुलशन है माँ क्या है? वो तनमन है माँ क्या है? वो सावन है माँ क्या है? वो पावन है माँ क्या है? वो मंदिर है माँ क्या है? वो मस्कन है माँ क्या है? वो अपनापन माँ क्या है? मेरी बचपन माँ क्या है? जा की खन खन माँ क्या है? वो दामन है माँ क्या है? वो आंचल है माँ क्या है? वो ख़ुशी है माँ क्या है? वो पागलपन माँ क्या है? सीतल पलना माँ क्या है? मन की आशा माँ क्या है? मेरी भाषा माँ क्या है? वो सोना है माँ क्या है? हाँ हीरा है माँ क्या है? वो मोती है माँ क्या है? डर की कदगन माँ क्या है? दिल की धड़कन माँ क्या है? मन का भटकन माँ क्या है? दिल का बंधन माँ क्या है? जग का दर्शन तू क्या है? बेटा उस का वो क्या है? जीवन मेरी वो क्या है? जीवन मेरी — Raunak Karn
लाख तकलीफ़ें लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना सीख लो हम सेे ज़रा सा गुनगुनाना सर्द रातों में कभी जो ख़्वाब टूटे ज़िंदगी गर जो कभी भी तुम सेे रूठे याद रखना आस का दामन न छूटे तोड़ देना पिंजरा तुम चाहे सपन का हौसला ख़ुद का ही ख़ुद से तुम बढ़ाना लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना सीख लो हम सेे ज़रा सा गुनगुनाना पीठ पीछे कर के देखो तुम न चलना वक़्त के जैसे कभी भी तुम न ढलना कोशिशों के साथ जीना कर न मलना राग गाना तुम ख़ुशी के तब मिलन का बारिशों के बूंदों से ख़ुद को भिगाना लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना सीख लो हम सेे ज़रा सा गुनगुनाना क़ाफ़िला होगा तिरे पीछे चलेंगे वक़्त ले कर के सभी तुझ सेे मिलेंगे दर्द सारे घाव सब के सब भरेंगे साथ ये मत छोड़ना तुम बस जतन का दिल के रिश्ते को ज़रा दिल से निभाना नाम ऊँचा ख़ूब ऊँचा तुम बनाना रूठे लोगों को कभी दिल से मनाना लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना सीख लो हम सेे ज़रा सा गुनगुनाना — Raunak Karn
"दिखावा अब नहीं करना" किसी अंजान पे ये जज़्बें ज़ाया' अब नहीं करना मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना कभी पागल नहीं होना कभी दिल भी नहीं देना कभी हँसते ही रहना है कभी मर मर के जीना है कभी इज़हार मत करना कभी तुम साथ मत रहना कभी मिलना अगर ख़ुद से तो तुम सेे बात कहनी है किसी को दिल नहीं देना अकेला अब नहीं करना मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना कभी जो छोड़ दे कोई बहुत तकलीफ़ होती है उसी की याद में ये आँख सारी रात रोती है ज़रा ख़ुद को निखारो अब बनाओ नाम अब अपना कभी मिलना अगर ख़ुद से तो तुम सेे बात कहनी है सताए तुम को कोई ख़ुद को आधा अब नहीं करना मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना हमारे पास तो घर भी नहीं है यार रहने को कोई पूछे हमारे पास क्या ही होगा कहने को कभी हम रो नहीं सकते कभी कुछ कह नहीं सकते कभी मिलना अगर ख़ुद से तो तुम सेे बात कहनी है अकेले घुट के मरने का इरादा अब नहीं करना मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना किसी से कोई झूठा सच्चा वा'दा अब नहीं करना किसी को जान या अपना पराया अब नहीं करना किसी अंजान पे ये जज़्बें ज़ाया' अब नहीं करना मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना — Raunak Karn