"दिखावा अब नहीं करना"

किसी अंजान पे ये जज़्बें ज़ाया' अब नहीं करना
मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना

कभी पागल नहीं होना कभी दिल भी नहीं देना
कभी हँसते ही रहना है कभी मर मर के जीना है
कभी इज़हार मत करना कभी तुम साथ मत रहना
कभी मिलना अगर ख़ुद से तो तुम से बात कहनी है
किसी को दिल नहीं देना अकेला अब नहीं करना
मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना

कभी जो छोड़ दे कोई बहुत तकलीफ़ होती है
उसी की याद में ये आँख सारी रात रोती है
ज़रा ख़ुद को निखारो अब बनाओ नाम अब अपना
कभी मिलना अगर ख़ुद से तो तुम से बात कहनी है
सताए तुम को कोई ख़ुद को आधा अब नहीं करना
मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना

हमारे पास तो घर भी नहीं है यार रहने को
कोई पूछे हमारे पास क्या ही होगा कहने को
कभी हम रो नहीं सकते कभी कुछ कह नहीं सकते
कभी मिलना अगर ख़ुद से तो तुम से बात कहनी है
अकेले घुट के मरने का इरादा अब नहीं करना
मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना

किसी से कोई झूठा सच्चा वा'दा अब नहीं करना
किसी को जान या अपना पराया अब नहीं करना
किसी अंजान पे ये जज़्बें ज़ाया' अब नहीं करना
मुहब्बत दिल में रखनी है दिखावा अब नहीं करना

— Raunak Karn

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