"यादों के सहारे"
वो न होगी उस की यादों के सहारे काट लेंगे
चाहे आँसू आँखों के दोनों किनारे काट लेंगे
अपनी अपनी बात है होगा कहीं वो भी अकेले
याद करता हो कहीं यूँ ही अकेली रातों में भी
पर ये मेरा ही भरम है वो बहुत ख़ुश हो कहीं पे
और हो तो बात अच्छी है कि सबकी ज़िंदगी है
अपना क्या है यार तन्हाई बहारें काट लेंगे
ख़ूब-सूरत होश वाले सब इशारे काट लेंगे
होंठों पे मुस्कान ले के सब शरारे काट लेंगे
वो न होगी उस की यादों के सहारे काट लेंगे
वो न होगी उस की यादों के सहारे काट लेंगे
— Raunak Karn















