हमें देते थे टॉफ़ी तुम सनम अब भूल बैठे हो
कभी तो पूछ लो हम से कि तुम दिलदार कैसे हो
चले जाओ रहो तुम ख़ुश करो तुम नाम भी अपना
कभी भी हम न बोलेंगे कि तुम ऐ यार मेरे हो
तुम्हें हम छोड़ देते और अपना भी नहीं कहते
मगर इस बात से लगता है दिलबर तुम भी सह
में हो
— Raunak Karn















