“राखी”

बहन ने बाँध कर राखी जताया प्यार राखी का
बरस के बा'द आया फिर ये अब त्योहार राखी का
चमन से फूल लाओ या ले आओ शाख़ ही कोई
बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का

हमें पहना के राखी और फिर बोले बहन मेरी
सुनहरी शाख़ रेशम से बनी है प्यार की राखी
मोहब्बत में कहा मैं ने कि ये सरदार राखी का
बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का

दुका वाले भी झू
मेंगे अरे माली भी झूमेगा
इसी त्योहार में जब फूल बनके राखी चूमेगा
कभी भी प्यार को अपने नहीं भाई जताता है
मुसीबत में पड़े बहना तो उस को वो बचाता है
हमारी चाहतों पे है असर दिलदार राखी का
बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का

नहीं आता हैं भाई जब कभी सरहद से अपने घर
अरे उस की बहन से पूछो ग़म उस के जुदाई का
कभी राणा ने बोला था बहन के प्यार की बातें
अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
बनाया है मुझे उस ने भला सरदार राखी का
बहन के बाँधने से बनता है ये हार राखी का

— Raunak Karn

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