हमारा अब कोई हमदम नहीं है
चलो इस बात का भी ग़म नहीं है
पढ़ाई नौकरी फिर घर चलाना
कोई तो और अब आलम नहीं है
रुकी है बात इक इज़हार पे बस
ये दूरी भी तो बोलो कम नहीं है
गए वो वक़्त जब मस्ती में थे हम
वो प्यारा दौर वो मौसम नहीं है
किया है याद उस को यादों में ही
हमारे पास तो अल्बम नहीं है
फिरे हैं नोचने वाले ही 'रौनक'
किधर देखें कहीं आदम नहीं है
— Raunak Karn















