तुम्हें क्या बताऊँ कि कैसी है दुनिया
बग़ीचे में काँटों के जैसी है दुनिया
मुझे लूट कर के बहुत ख़ुश हुए हैं
नहीं जानता था कि ऐसी है दुनिया
हो कोई गिरा मानो दलदल में जैसे
हक़ीक़त में बिल्कुल ही वैसी है दुनिया
— Raunak Karn
बग़ीचे में काँटों के जैसी है दुनिया
मुझे लूट कर के बहुत ख़ुश हुए हैं
नहीं जानता था कि ऐसी है दुनिया
हो कोई गिरा मानो दलदल में जैसे
हक़ीक़त में बिल्कुल ही वैसी है दुनिया
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