k | कभी रोए कभी खोए कभी तोड़े गए हैं हम

  - Raunak Karn

कभी रोए कभी खोए कभी तोड़े गए हैं हम
मुहब्बत बोझ थी शायद अरे छोड़े गए हैं हम

नहीं करते कभी इज़हार हम अपनी मुहब्बत का
उसी इक शख़्स के बातों से ही मोड़े गए हैं हम

मुहब्बत थी मुहब्बत है मगर पागल नहीं हैं हम
किसी पागल से 'आशिक़ पे कभी थोड़े गए हैं हम

करेंगे नाम हम ऐसा ज़माना ख़ूब देखेगा
अभी हालात के पत्थर से ही फोड़े गए हैं हम

हमारी भी तलब हो क्यूँँ किसी को बोलो भी 'रौनक'
ग़रीबी जाल है जिस सेे अभी जोड़े गए हैं हम

  - Raunak Karn

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