bulaayaa hai tumhein to phir bhala ghar kyuuñ nahin jaate | बुलाया है तुम्हें तो फिर भला घर क्यूँ नहीं जाते

  - Raunak Karn

बुलाया है तुम्हें तो फिर भला घर क्यूँ नहीं जाते
मुझे अपनी मुहब्बत से रिहा कर क्यूँ नहीं जाते

जो तुम यूँँ जा रहे हो बे-ख़बर होकर हमीं से अब
सुनो सुन लो ज़रा फिर यार तुम मर क्यूँ नहीं जाते

रहे तन्हाइयों में हम हमेशा से ही सच है ये
मगर अब पास से ऐ यार लश्कर क्यूँ नहीं जाते

मुझे जब प्यास थी तब पास में पानी नहीं था पर
बुझी अब प्यास है तो फिर समुंदर क्यूँ नहीं जाते

नहीं है अब ज़रूरत इस दिल-ओ-जाँ की मुझे सच में
न जाने पास से मेरे ये दिलबर क्यूँ नहीं जाते

  - Raunak Karn

Love Shayari

Our suggestion based on your choice

More by Raunak Karn

As you were reading Shayari by Raunak Karn

Similar Writers

our suggestion based on Raunak Karn

Similar Moods

As you were reading Love Shayari Shayari