लाख तकलीफ़ें

लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना
सीख लो हम से ज़रा सा गुनगुनाना

सर्द रातों में कभी जो ख़्वाब टूटे
ज़िंदगी गर जो कभी भी तुम से रूठे
याद रखना आस का दामन न छूटे
तोड़ देना पिंजरा तुम चाहे सपन का
हौसला ख़ुद का ही ख़ुद से तुम बढ़ाना
लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना
सीख लो हम से ज़रा सा गुनगुनाना

पीठ पीछे कर के देखो तुम न चलना
वक़्त के जैसे कभी भी तुम न ढलना
कोशिशों के साथ जीना कर न मलना
राग गाना तुम ख़ुशी के तब मिलन का
बारिशों के बूंदों से ख़ुद को भिगाना
लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना
सीख लो हम से ज़रा सा गुनगुनाना

क़ाफ़िला होगा तिरे पीछे चलेंगे
वक़्त ले कर के सभी तुझ से मिलेंगे
दर्द सारे घाव सब के सब भरेंगे
साथ ये मत छोड़ना तुम बस जतन का
दिल के रिश्ते को ज़रा दिल से निभाना
नाम ऊँचा ख़ूब ऊँचा तुम बनाना
रूठे लोगों को कभी दिल से मनाना
लाख तकलीफ़ें हों फिर भी मुस्कुराना
सीख लो हम से ज़रा सा गुनगुनाना

— Raunak Karn

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