किताबों से ही मैं वफ़ा चाहता हूँ
अकेले कहीं घूमना चाहता हूँ
मोहब्बत नहीं है मुझे यार तुम से
मैं तो बस तुम्हें देखना चाहता हूँ
ये सीखा कहाँ तुम ने बातें बनाना
मैं तो इक हसीं दिलरुबा चाहता हूँ
नहीं चाहिए प्यार मुझ को किसी से
मैं तुम सा ही इक बे-वफ़ा चाहता हूँ
— Raunak Karn















