हमें अपनों ने भी बोला अरे तू तो पराया था
तिरे जो संग रिश्ता था वो तो बस इक तमाशा था
तेरी मुस्कान को हमने ही आँखों में सजाया था
उसी ने चाह को फिर से ठिकाने तब लगाया था
जिसे भी शौक़ से देखा किया मैंने ज़माने में
उसी ने यार मुझको बस सताया है सताया था
सभी से जो मिला हमको वो मानो यार धोखा था
मगर फिर भी कभी हमने किसी को भी न टोका था
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