हमें अपनों ने भी बोला अरे तू तो पराया था
तिरे जो संग रिश्ता था वो तो बस इक तमाशा था
तेरी मुस्कान को हम ने ही आँखों में सजाया था
उसी ने चाह को फिर से ठिकाने तब लगाया था
जिसे भी शौक़ से देखा किया मैं ने ज़माने में
उसी ने यार मुझ को बस सताया है सताया था
सभी से जो मिला हम को वो मानो यार धोखा था
मगर फिर भी कभी हम ने किसी को भी न टोका था
— Raunak Karn















