इक कहानी मुझे याद आती रहे
चाँद तारों की बातें सुनाती रहे
वो मुझे याद करती रहे हर समय
याद उसकी मुझे भी बुलाती रहे
शाख़ गुल ये हवा ये नदी ये महक
कोई धुन बनके मुझ
में समाती रहे
दिल लगाना ग़लत बात होगी मगर
ज़िंदगी मुझ सेे दिल-विल लगाती रहे
बोझ मुझपे है घर का मैं माँ से सुनूँ
बात चाहे मुझे ये सताती रहे
लोग जाए तो जाने दो 'रौनक' मगर
ये उदासी कोई नग़्मा गाती रहे
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