तुम को बताते कि उस पार क्या है

निगाहों से होकर कभी दिल में जाते
कलेजे पे रख सर सदा सी सुनाते
वो ख़्वाबों की लोरी हक़ीक़त बनाते
दु'आओं में जैसे कोई बात लाते
मुझे अपने दिल की जो बातें बताती
तो तुम को बताते कि उस पार क्या है

छुपा के जो रक्खे थे लफ़्ज़ों में जज़्बें
किए थे मिरे दिल पे तुम ने ही क़ब्ज़े
तेरे नाम वाले सभी ख़त वहीं थे
तेरे होंठ पे गीत मेरे भी बसते
कभी पास आ कर अगर तुम जो पढ़ते
तो तुम को बताते कि उस पार क्या है

वो ख़्वाबों की रातें वो तन्हा सवेरा
वो सन्नाटे जिन
में था तेरा बसेरा
लबों पे दुआ थी तेरे नाम वाली
दुआ में थी बस रौशनी काली काली
अगर एक पल को भी तुम मिलने आती
तो तुम को बताते कि उस पार क्या है

कभी धड़कनों में जो लफ़्ज़ों को पाते
कभी साँसों से शे'र मेरे बनाते
तेरे होंठ खुल के अगर कुछ भी कहते
दिलों में मिरे लफ़्ज़ तेरे ही रहते
जो तुम मेरी ख़ामोशियों को समझते
तो तुम को बताते कि उस पार क्या है

हरी धार लहरों की चलके जो आती
मुहब्बत के मानी तुम्हें तब बताती
मेरे दिल में बजते सभी राग गाते
ज़रा सा कभी तुम जो वो राग गाती
नज़र से नज़र को कभी तुम मिलाती
तो तुम को बताते कि उस पार क्या है

मुझे जो बताते अगर सब जताते
तो मालूम होता कि उस पार क्या है
ज़रा सा बताऊॅं कि उस पार क्या है
है उस पार इक बेज़बाॅं सी कहानी
जिसे पढ़ के आँखों में आ जाए पानी
जिसे मैं ने ख़ुद को सुनाया हमेशा
जिसे पढ़ के ख़ुद को है पाया अकेला
न जाने वो इक चेहरा दिखने में प्यारा
उसी के लिए है मिरे दिल में रिश्ते
वही बन गए हैं मिरे दिल के हिस्से
वो अश्कों की गर्मी वो नज़रों की छाया
जिधर देखा मैं ने उधर उस को पाया
वहाँ ख़्वाब बुनते हैं वीराने लम्हें
जिसे देख धड़कन रहे सह
में सह
में
वहाँ हर दुआ में तेरा नाम आता
वहाँ हर ग़ज़ल में तू हीं मुस्कुराता
वहाँ बिन तेरे कुछ भी रौशन नहीं है
वहाँ तेरी बातें ही केवल सही हैं
मैं हर दर्द को इक सहारा बनाता
मैं तकलीफ़ों में तुझ को जीना सिखाता
कभी बहते झरने किनारे जो मिलते
गले से लगाता निगाहें बिछाता
मुहब्बत है हम को ये तुम जान पाती
इधर से निखरती उधर से सॅंवरती
हँसी ख़ूब करती लगड़ती झगड़ती
अगर तू कभी दिल की तह तक उतरती
तो तुम को बताते कि उस पार क्या है
तो तुम को बताते कि उस पार क्या है

— Raunak Karn

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