है प्यार मुझ को कितना बताना पड़ा उसे

फिर आख़िरी में मुझ को भुलाना पड़ा उसे

पहले तो उस ने प्यार जताया बहुत मगर
फिर क्या हुआ कि छोड़ के जाना पड़ा उसे

इक रोज़ वो मिली तो कोई बात भी न की
मुँह फेर मुझ से क्यूँ कहीं जाना पड़ा उसे

हर दिन मैं उस को याद भी आता था और फिर
मुझ को यूँ ज़ेहन से भी मिटाना पड़ा उसे

जब तक रहा वो साथ उसे तकलीफ़ थी बहुत
तो फ़ासला यूँ मुझ से बनाना पड़ा उसे

रौनक ने ये कहा कि मुहब्बत दिखावा है
ये बात सच थी सच तो जताना पड़ा उसे

— Raunak Karn

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