रो लेने में एक सहूलत ये भी है
बोझिल आँखें दिल हल्का कर देती है
उसका पीछा छोड़ भी दो दुनिया वालो
उस रिश्ते में सारी ग़लती मेरी है
सपनों से बाहर आजा प्यारे शायर
अगले महीने उस लड़की की शादी है
ख़ुदगर्ज़ी को पीछे रख के सोच ज़रा
तुझ सेे पहले वो माँ-बाप की लड़की है
उसके ख़ातिर पंखे तक जाने वाले
तूने क्या आगे की दुनिया देखी है
कब तक यूँँ तन्हा रहना है ओ 'तन्हा'
जब तक उस बंसी वाले की मर्ज़ी है
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