मांगनी पड़ती है क्या कोई इज़ाज़त आपसे
जो अग़रचे करनी हो थोड़ी मोहब्बत आपसे
वक़्त पर आते नहीं, कितने बुरे हो तुम, ये वो
कोई करता होगा ऐसी भी शिकायत आपसे
हैं जो नाजुक फूल काँटे रखते अपने साथ में
सीख लेनी चाहिए उनको नज़ाकत आपसे
दूर से ही देखकर कब थी गुजरनी ज़िंदगी
हाथ छूने थे मुझे सो की रफ़ाक़त आपसे
ये जरूरी तो नहीं मुझको परेशानी मिले
क्या पता मिलती हो थोड़ी थोड़ी राहत आपसे
चाँदनी देखी नज़ारे देखे, देखे हुस्न भी
इस जहाँ में कुछ नहीं है खूबसूरत आपसे
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