yaar hijr men bhi KHush kitne the ham dono | यार हिज्र में भी ख़ुश कितने थे हम दोनों

  - Saahir

यार हिज्र में भी ख़ुश कितने थे हम दोनों
वो जब फिर मिलने को बिछड़े थे हम दोनों

वो तेरे साथ ठीक सा ही लगता है पर
साथ में काफ़ी अच्छे लगते थे हम दोनों

दुनिया ने तो चल के जाना ही था ऐसे
'इश्क़ थे और 'इश्क़ के रस्ते थे हम दोनों

तुमने टॉम एंड जैरी को देखा है ना
थोड़ा थोड़ा वैसे ही रहते थे हम दोनों

कोई पूछेगा तो क्या कहना है 'साहिर'
एक दूसरे के क्या लगते थे हम दोनों

  - Saahir

Dosti Shayari

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