dhoondhte ho jise tum yahaañ raushni men | ढूंढते हो जिसे तुम यहाँ रौशनी में

  - Saahir

ढूंढते हो जिसे तुम यहाँ रौशनी में
खो गया है वहीं पे कहीं तीरगी में

जिस तरह साथ में हम अभी हैं नहीं थे
इक दफ़ा फ़ासला भी रहा दोस्ती में

'इश्क़ करना सभी से मिले जो भी तन्हा
ये सिखाया गया है मुझे ज़िंदगी में

एक लड़की का दिल टूटा है फिर कहीं पर
एक लड़का कहीं उतरा है शायरी में

कोई मुझको पढ़े और रोये सो मैंने
ख़ुद को ही क़ैद कर रक्खा है डायरी में

  - Saahir

Raushni Shayari

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