vo maa to mar hi jaayegi sad | वो माँ तो मर ही जाएगी सद

  - Saahir

वो माँ तो मर ही जाएगी सद
में से
वो जिसका बेटा लटका हो पंखे से

उसको मार दिया जाता है धोखे से
जिस सेे जीत नहीं पाते हैं आगे से

जिसको भी अपनी मर्ज़ी से मरना है
वो क्यूँँ हाथों को बांधेगा फीते से

मैने चेहरे पे तलवार नहीं मारी
मेरे गाल पे दाग पड़ा है रोने से

कौन दर-ओ-दीवारों पे सर मारे है
किसकी चीखें आती हैं उस कमरे से

मेरे जूते फ़टे हुए हैं लेकिन मैं
जीत चुका हूँ पहले दौड़ इरादे से

'इश्क़ निभाने को तुम अपनी बेटी की
शादी करवा देना मेरे बेटे से

तुमको और उधार नहीं दे सकता हूँ
मैं ख़ुद काफ़ी कर्ज़े में हूँ पहले से

मैं अच्छी तस्वीर बना लेता लेकिन
उसको देख नहीं पाया था अच्छे से

मुझको परेशानी हो रक्खी है साहब
अपनी नज़र हटा लो मेरे चेहरे से

मुझको आगे बढ़ना है लेकिन यादें
आवाज़ें देती रहती हैं पीछे से

उसको चाहो लेकिन इक हद तक साहिर
चींटी मर सकती है ज्यादा मीठे से

  - Saahir

Nazar Shayari

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