ज़िंदगी काटी है उसने मोजिज़े में
ये मोहब्बत पड़ गई जिसके गले में
कोई टकराई थी मुझ सेे रास्ते में
मैं गिरा भी 'इश्क़ में तो हादसे में
आओ बैठो बात करनी है मोहब्बत
छोड़ कर क्यूँ जा रही हो रास्ते में
दिल दुखा के भी वो ख़ुश है ऐ ख़ुदा क्या
आ गई है खोट तेरे फ़ैसले में
मैं जिसे मतलब बदन से है मुझे भी
'इश्क़ करते देख लोगे मशवरे में
लड़की मुझ सेे 'इश्क़ मत करना कभी भी
अच्छे घर की लगती हो तुम देखने में
मर के मुफ़्लिस को कई लाखों मिले हैं
और कितना अच्छा हो इक हादसे में
लग रहा है डर अभी भी आदमी से
उसको जो बेची गई थी छुटपने में
एक औरत है मेरे घर में कि जिसकी
'उम्र बीती सारी सब दिल जीतने में
दूरियाँ मीलों की देखी मैंने मौला
गाँव में भी कुछ घरों के फ़ासले में
है मिली जिस
में सज़ा-ए-मौत साहिर
मैं कभी था ही नहीं इस मसअले में
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