Saahir
Saahir
Ghazal

क्यूँ आ जाते हो सीधे मक़्ते पर

पहले थोड़ा काम करो मतले पर

हाथों ने क्या जुर्म किया इनने तो
ख़ंजर मारा है दिल के कहने पर

इश्क़ हमारा ख़त्म हुआ आँखों पे
पकड़े गए पहली चिट्ठी लिखने पर

जीते हुओं पर ही सबकी आँखें थी
हारे हुए भी अच्छे खेले थे पर

इश्क़ में सबकी जोड़ी पे बाजी है
दाँव लगाया है मैं ने इस रस्ते पर

मैं इक ऐसी दुनिया से हूँ जिस
में
नहला भारी होता है दहले पर

ये होगा वो होगा क्या सोचा था
दुनिया टिकती है अपने वादे पर?

याद रखे दुनिया सो कुछ यूँ करना
आओ तो आओ पहले दरजे पर

आँसू आँखों तक आ कर रुकने हैं
सबने रोक लगाई है बहने पर

— Saahir

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