क्यूँ आ जाते हो सीधे मक़्ते पर
पहले थोड़ा काम करो मतले पर
हाथों ने क्या जुर्म किया इनने तो
ख़ंजर मारा है दिल के कहने पर
'इश्क़ हमारा ख़त्म हुआ आँखों पे
पकड़े गए पहली चिट्ठी लिखने पर
जीते हुओं पर ही सबकी आँखें थी
हारे हुए भी अच्छे खेले थे पर
'इश्क़ में सबकी जोड़ी पे बाजी है
दाँव लगाया है मैने इस रस्ते पर
मैं इक ऐसी दुनिया से हूँ जिस
में
नहला भारी होता है दहले पर
ये होगा वो होगा क्या सोचा था
दुनिया टिकती है अपने वादे पर?
याद रखे दुनिया सो कुछ यूँँ करना
आओ तो आओ पहले दरजे पर
आँसू आँखों तक आकर रुकने हैं
सबने रोक लगाई है बहने पर
Our suggestion based on your choice
As you were reading Shayari by Saahir
our suggestion based on Saahir
As you were reading Anjam Shayari Shayari