मुझ को कितना घोर दुख है
मेरे चारों ओर दुख है
चैन चोरी हो गया है
और इस का चोर दुख है
मैं ने चुप रहना कहा था
क्यूँ मचाया शोर दुख है
जिन को शब अच्छी लगे है
उन सभी को भोर दुख है
ज़िंदगी की डोरी का इक
छोर सुख इक छोर दुख है
सुख के सारे मोतियों को
बाँधे है जो डोर दुख है
— Saahir















