मुझको कितना घोर दुख है
मेरे चारों ओर दुख है
चैन चोरी हो गया है
और इसका चोर दुख है
मैंने चुप रहना कहा था
क्यूँ मचाया शोर दुख है
जिनको शब अच्छी लगे है
उन सभी को भोर दुख है
ज़िंदगी की डोरी का इक
छोर सुख इक छोर दुख है
सुख के सारे मोतियों को
बाँधे है जो डोर दुख है
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