Saahir
Saahir
Ghazal

माँगनी पड़ती है क्या कोई इजाज़त आपसे

जो अग़रचे करनी हो थोड़ी मोहब्बत आपसे

वक़्त पर आते नहीं, कितने बुरे हो तुम, ये वो
कोई करता होगा ऐसी भी शिकायत आपसे

हैं जो नाजुक फूल काँटे रखते अपने साथ में
सीख लेनी चाहिए उन को नज़ाकत आपसे

दूर से ही देख कर कब थी गुजरनी ज़िंदगी
हाथ छूने थे मुझे सो की रफ़ाक़त आपसे

ये ज़रूरी तो नहीं मुझ को परेशानी मिले
क्या पता मिलती हो थोड़ी थोड़ी राहत आपसे

चाँदनी देखी नज़ारे देखे, देखे हुस्न भी
इस जहाँ में कुछ नहीं है ख़ूब-सूरत आपसे

— Saahir

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