kabhi idhar to kabhi ham udhar talashte hain | कभी इधर तो कभी हम उधर तलाशते हैं

  - Shajar Abbas

कभी इधर तो कभी हम उधर तलाशते हैं
अमाँ के वास्ते छोटा सा घर तलाशते हैं

ख़िज़ाँ के बाद चमन में बहार आई है
परिंद फिर से नए बाल-ओ-पर तलाशते हैं

अरे वो छोड़ गया ख़ाक डालो आओ चलो
सफ़र में कोई नया हम-सफ़र तलाशते हैं

तमाम शहर तलाश-ए-रह-ए-सुकून में है
यहाँ पे हम हैं रह-ए-पुर-ख़तर तलाशते हैं

बरस से हिज्र की इस चिलचिलाती-धूप में हम
भटक के दश्त में हर सू शजर तलाशते हैं

  - Shajar Abbas

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