majlis-e-ishq men khutba jo naya dete ho | मजलिस-ए-इश्क़ में ख़ुतबा जो नया देते हो

  - Shajar Abbas

मजलिस-ए-इश्क़ में ख़ुतबा जो नया देते हो
सच कहूँ आप मिरा दर्द बढ़ा देते हो

आह क्या ख़ूब सलीक़े से सज़ा देते हो
ज़ख़्म देकर हमें जीने की दु'आ देते हो

गर्दन-ए-ख़्वाब पे हर अहल-ए-सहर आकर तुम
यार बेचैनी की शमशीर चला देते हो

क्यूँ न हैरत भरी नज़रों से तुम्हें देखे जहाँ
बे-वफ़ा शख़्स हो पैग़ाम-ए-वफ़ा देते हो

ज़िंदगी अपनी उसे एक सज़ा लगती है
आप जिसको भी निगाहों से गिरा देते हो

उम्र भर आप की ममनून रहूँगी मैं शजर
शुक्रिया आप का तोहफ़े में रिदा देते हो

  - Shajar Abbas

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