shikasta dil kii marammat koii nahin karta | शिकस्ता दिल की मरम्मत कोई नहीं करता

  - Shajar Abbas

शिकस्ता दिल की मरम्मत कोई नहीं करता
मरीज़ हूँ मैं अयादत कोई नहीं करता

ख़ुदा का शुक्र मिरे शहर और क़बीले में
सितमगरों की हिमायत कोई नहीं करता

किसी को जिस्म किसी को हवस है दौलत की
बिना ग़रज़ के मुहब्बत कोई नहीं करता

अमीर-ए-शहर को झुककर सलाम करते हैं
ग़रीब-ए-शहर की इज़्ज़त कोई नहीं करता

ये लोग ज़ुल्फ़-ए-परेशाँ पे तंज करते हैं
इन्हें बनाने की ज़हमत कोई नहीं करता

उसूल-ए-इश्क़ बदल डाले नौजवानों ने
फ़िराक़-ए-यार में वहशत कोई नहीं करता

शजर जो दिल-लगी करना ये सोचकर करना
यहाँ किसी से मुरव्वत कोई नहीं करता

  - Shajar Abbas

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