दुनिया की तरह अपनी ज़रूरत नहीं बदली
कपड़ो की तरह हमने मुहब्बत नहीं बदली
बचपन से वफ़ादार थे हामी-ए-वफ़ा थे
बचपन की जवाँ हो के भी आदत नहीं बदली
हाकिम तो कई बदले मगर ज़ुल्म सितम की
अफ़सोस यहाँ कोई रिवायत नहीं बदली
बर्बाद वतन सारा ये कर डालेंगे हाकिम
अब उठ के अगर हमने हुकूमत नहीं बदली
तक़लीद सदा क़ैस की करते रहे हम सब
हमने कभी पुरखों की शरीयत नहीं बदली
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